हरियाणा: अब दान की जमीन के मालिक नहीं बन सकेंगे ब्राह्मण, पुजारी और पुरोहित, बिल में हुआ संशोधन!

सरकारी की ओर से पंचायती, शहरी या स्थानीय निकाय द्वारा दान में दी गई भूमि का मालिकाना हक नहीं देने का फैसला लिया गया है. इसको लेकर हरियाणा सरकार द्वारा दान दी गई जमीन या शामलात की जमीन को लेकर विधेयक को राज्यपाल के जरिए राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है. इस मंजूरी के बाद सरकारी जमीनों पर कब्जा छुड़वाने को लेकर सरकार ने कानूनी प्रक्रिया को तेज कर दिया है.
इस विधेयक में संशोधन करते हुए जो विधेयक पारित किया गया है, वह पूर्व में ब्राह्मणों समेत 12 जातियों को सरकार के द्वारा दिया जा रहा मालिकाना हक अब नहीं दिया जाएगा. यह मामला लगभग 4 साल पहले 2018 में विधानसभा में वर्तमान सरकार के द्वारा संशोधन के लिए लाया गया. जिस पर विपक्ष ने कईं बार आपत्ति दर्ज करवाई थी.
खट्टर सरकार द्वारा साल 2018 में इस कानून में संशोधन किया गया. जिस पर राज्यपाल के हस्ताक्षर होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा गया. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सरकार द्वारा इसका नोटिफिकेशन जारी किया गया. सरकार का दावा है कि इस कानून से शामलात जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त बंद हो जाएगी और सरकार के द्वारा उन्हें अब मालिकाना हक नहीं दिया जाएगा.
सरकार ने अब फैसला किया है कि कोई दोहलीदार (गरीब ब्राह्मणों, पुजारियों और पुरोहितों) ऐसी किसी भी जमीन का मालिकाना हक प्राप्त नहीं कर सकता, जो पंचायत की है, वह शहरी निकायों में आ चुकी है और राज्य सरकार के स्वामित्व वाली है. ऐसी जमीन भी दोहलीदारों के नाम नहीं हो सकती, जिसकी मालिक सरकार है, भले ही वह जमीन कहीं भी मौजूद है और दोहलीदारों को आवंटित है.पंचायतों ने जो जमीन दोहलीदारों को दान में दे रखी है, उस पर भी दोहलीदारों का मालिकाना हक नहीं होगा. इस जमीन की खरीद-फरोख्त दोहलीदार नहीं कर सकते.
पुराने समय में कि गरीब ब्राह्मणों, पुजारियों और पुरोहितों को फसल बोने के लिए जमीन दान में दे दी जाती थी. यह जमीन पंचायती होती थी, जिस पर उनका मालिकाना हक तो नहीं होता था, लेकिन वह फसल बोकर प्राप्त होने वाली आमदनी को अपने ऊपर खर्च करने का अधिकार रखते थे। इसी श्रेणी के लोगों को दोहलीदार कहा जाता है.
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