सीवर सफाई में मौत पर परिजनों को 30 लाख का मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट

देश में सीवर सफाई के दौरान होने वाली मौत की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सफाई कर्मियों की मौत पर परिजनों को 30 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा. जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि सीवर की सफाई के दौरान स्थायी दिव्यांगता का शिकार होने वालों को न्यूनतम मुआवजे के रूप में 20 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा तो वहीं अन्य दिव्यांगता के लिए 10 लाख रूपये दिए जाएंगे.
पीठ ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हाथ से मैला ढोने की प्रथा पूरी तरह खत्म हो. पीठ ने निर्देश दिया कि सरकारी एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने के लिए समन्वय करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं न हों और इसके अलावा, हाईकोर्ट को सीवर से होने वाली मौतों से संबंधित मामलों की निगरानी करने से न रोका जाए.
वहीं सरकार की ओर से लोकसभा में फरवरी, 2021 में पेश किए गये आंकड़ों के अनुसार पिछले 5 साल में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करते हुए 340 सफाईकर्मियों की मौत हुई है. सरकार के ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने भी 2020 में अपनी रिपोर्ट जारी की थी. राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 2010 से लेकर 2020 तक यानी दस साल में सेप्टिक टैंक और सीवर की सफाई के दौरान 631 सफाईकर्मियों की मौत हुई है.
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