फिर दिल्ली कूच करेंगे किसान, केंद्र सरकार के खिलाफ फरवरी में होगा आंदोलन!

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने केंद्र सरकार की “किसान विरोधी” नीतियों को लेकर अगले तीन महीनों में देश भर में महापंचायतें आयोजित करने और उसके बाद राजधानी दिल्ली में कूच करने का फैसला लिया है. किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में विभिन्न मांगों को लेकर किसान आंदोलन की रणनीति बनाई.
बैठक में किसानों को सरकार की किसान विरोधी नीतियों और किसानों की मांगों के बारे में जागरूक करने के लिए अगले तीन महीनों में देश भर में 20 महापंचायतें आयोजित करने का निर्णय लिया गया.
संगठन ने एक बयान में कहा. किसानों की आठ मुख्य मांगें हैं, जिनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद की गारंटी वाला कानून, कर्ज माफी, बिजली क्षेत्र का निजीकरण रोकना और 60 साल से अधिक उम्र के किसानों को पेंशन देना शामिल है.
बयान के अनुसार, बैठक में सभी संगठनों ने सर्वसम्मति से राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के लिए “जानबूझकर” किसानों को जिम्मेदार ठहराने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया. संगठन ने कहा कि धान की 1509 और पीआर किस्मों की कटाई सितंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू होती है लेकिन अक्टूबर में प्रदूषण नहीं बढ़ता है. त्योहारों का मौसम आने पर ही दिल्ली में यह प्रदूषण क्यों बढ़ जाता है?
किसान नेताओं ने कहा कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्य सरकारें पराली न जलाने वाले किसानों को धान पर 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दें, लेकिन अब तक किसी भी राज्य सरकार ने बोनस नहीं दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारें पराली के उचित प्रबंधन के लिए पर्याप्त मात्रा में सुपर सीडर और बेलर मशीनों की व्यवस्था नहीं कर रही हैं.
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