आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस कैसे बदल सकता है कृषि की तस्वीर

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पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर बहुत जोर-शोर से न सिर्फ चर्चा चल रही है बल्कि इस विषय पर व्यापक अध्ययन भी हो रहे हैं। विशेषज्ञ इसे चैथी औद्योगिक क्रांति का मूल आधार मान रहे हैं। कहा जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अधिकांश औद्योगिक गतिविधियों और सेवा क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला सकता है। भारत में भी विभिन्न क्षेत्रों में इसकी संभावनाओं को लेकर चर्चा चल रही है।
इस संदर्भ में यह जानना रोचक है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की कोई उपयोगिता भारत के कृषि में हो सकती है? क्या आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करके बदहाली की मार झेल रही भारतीय कृषि की तस्वीर बदली जा सकती है? क्या इसके उपयोग से भारती किसानों की दुर्दशा दूर की जा सकती है?
इन सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश में नीति आयोग की हाल ही में आई एक रिपोर्ट उपयोगी है। यह रिपोर्ट वैसे तो कई क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की संभावित उपयोगिता और इसे लागू करने की रणनीति पर केंद्रित है। लेकिन इस रिपोर्ट में इस बात का भी विस्तार से जिक्र किया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस भारतीय कृषि के लिए कितना उपयोगी साबित हो सकता है।
भारत में कृषि क्षेत्र कितना अहम है, इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के कुल श्रमिकों से 49 फीसदी इसी क्षेत्र में काम करते हैं। देश की जीडीपी में कृषि का योगदान 16 फीसदी है। देश की तकरीबन 1.3 अरब आबादी की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में देश के कृषि क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में अगर इस क्षेत्र की स्थिति सुधारने में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस उपयोगी होता है तो इससे देश को दीर्घकालिक तौर पर कई लाभ होंगे।
नीति आयोग ने इस रिपोर्ट में बताया है कि कृषि के पूरे वैल्यू चेन में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर कृषि क्षेत्र में इसका इस्तेमाल भी हो रहा है। नीति आयोग की इस रिपोर्ट में एक्सेंचर के अध्ययन का हवाला देकर बताया गया है कि डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल से 2020 तक देश के सात करोड़ किसानों को लाभ होगा।
अब सवाल यह उठता है कि कृषि के किन क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल हो सकता है। नीति आयोग की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे पहले तो इसका इस्तेमाल मिट्टी की सेहत पर नजर रखने और इसमें सुधार के लिए किया जा सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सेटेलाइट से जो तस्वीरें ली जाती हैं, उन तस्वीरों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करके मिट्टी की सेहत के बारे में जानकारियां हासिल करके मिट्टी की बेहतर सेहत सुनिश्चित की जा सकती है।
नीति आयोग ने यह भी बताया है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल फसल पर नजर रखने और इस पर आने वाले खतरों से तुरंत किसानों का आगाह करने में किया जा सकता है। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जमीन की नमी, फसल की सेहत और अन्य कई जानकारियों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि फसल किस स्थिति में है।
इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले मशीनों की दक्षता बढ़ाई जा सकती है और उनका अभी के मुकाबले और बेहतर इस्तेमाल हो सकता है।
नीति आयोग की इस रिपोर्ट में कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का एक महत्वपूर्ण इस्तेमाल यह बताया गया है कि इसके जरिए कृषि बाजारों में काफी बदलाव लाया जा सकता है। अभी सरकार ने इलैक्ट्राॅनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी ई-नैम विकसित किया है। नीति आयोग को लगता है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस्तेमाल से ऐसे बाजारों की क्षमता बढ़ेगी और किसानों को अपनी फसल के बदले अच्छे पैसे मिल पाएंगे।
अंततः आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस भारतीय कृषि के लिए कितना उपयोगी हो पाएगा, यह कहना अभी से तो मुश्किल है लेकिन नीति आयोग जैसी संस्था इसकी संभावनाओं को लेकर जितनी आशान्वित है, अगर उस स्तर पर इसका क्रियान्वयन हो जाए तो देश की कृषि की तस्वीर बदलने में थोड़ी मदद जरूर मिल सकती है।
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