बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे, राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कोरवा जनजाति के लोग!

ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से बड़ी-बड़ी योजनों की घोषणा की जाती हैं लेकिन गांव-देहात के लिए बनाई गईं अधिकतर सरकारी योजनाएं कागजों तक ही सिमटकर रह जाती हैं. छत्तीसगढ़ से एनबीटी में मुनेश्वर कुमार की रिपोर्ट के अनुसार बलरामपुर जिले के मानपुर गांव में कोरवा जनजाति के लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र के नाम से जाने जानी वाली कोरवा जनजाति के लोग पीने के साफ पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं. साफ पानी न मिलने के चलते कोरवा जनजाति के लोग गंदे नाले से पानी पीने के लिए मजबूर हैं.
छत्तीसगढ़ में रहने वाले कोरवा आदिवासियों की आदिम नस्ल है. इनका अपना विशिष्ट रहन-सहन, खान-पान, सभ्यता और संस्कृति है. इस जनजाति पर बढ़ रहे खतरे और घटती आबादी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कोरवा जनजाति को संरक्षित सूची में शामिल किया है. संविधान की संरक्षित सूची में शामिल होने के बाद भी कोरवा जनजाति के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं.
कोरवा जनजाति के लोग कहने को तो राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र हैं लेकिन गांव के लोग एक-एक बूंद साफ पानी के लिए तरस रहे हैं. छत्तीसगढ़ के कई आदिवासी गांवों में हर साल खराब पानी के कारण मलेरिया का प्रकोप फैलता है जो आदिवासी क्षेत्रों में मौतों की वजह बनता है.
बलरामपुर के मानपुर गांव में कोरवा जनजाति के 25 परिवार में लगभग 150 लोग रहते हैं. गांव में पानी न होने के कारण कोरवा जनजाति की महिलाएं और बच्चे नाले से पानी भरकर लाने को मजबूर हैं. गांववासियों ने बताया, “नेता चुनाव के दौरान वोट के लिए आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन आजतक गांव में पीने के साफ पानी की व्यवस्था नहीं हुई.”
वहीं सरपंच ने कहा, “मोहल्ले में पानी की व्यवस्था के लिए प्रयास किया जा रहा था लेकिन पंचायत को मिलने वाले राशि को दूसरे कामों में खर्च करा दिया गया.”
इस विधानसभा क्षेत्र से विधायक पूर्व की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं वहीं मौजूदा कांग्रेस विधायक भी राज्य सरकार में मंत्री है. लेकिन इसके बावजूद भी इन जनजातियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है.
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