भिवानी: अवैध खनन के चलते तोशाम में पहाड़ खिसकने से तीन मजदूरों की मौत, कई दबे

भिवानी के तोशाम खनन क्षेत्र में 1 जनवरी को डाडम पहाड़ के पिट नंबर 37-38 में भारी हादसा हुआ, जिसमें पहाड़ के दरकने की वजह से 10 से अधिक मजदूरों के दबे होने की सूचना मिल रही है. हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं और उन्हें हिसार के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मृतक छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं.
डाडम पहाड़ के माइनिंग माफिया 4 पोकलेन, 2 ड्रिल, अनेकों डंपर और बहुत सारे माइनिंग के कर्मचारियों से 40 मीटर के खतरनाक बेंच के नीचे गैरकाननूनी ढंग से जबरदस्ती काम करवा रहे थे.

इस हादसे में खनन में प्रयोग होने वाली पोपलैंड और अन्य कई मशीनें भी मलबे में दब गई है. तोशाम क्षेत्र के खानक और डाडम में बड़े स्तर पर पहाड़ खनन कार्य होता है. प्रदूषण के चलते 2 महीने पहले खनन कार्य पर रोक लगाई गई थी. एनजीटी ने गुरुवार को ही खनन कार्य दोबारा शुरू करने की इजाजत दी थी. एनजीटी से अनुमति मिलने के बाद शुक्रवार से ही खनन कार्य शुरू कर दिया गया था. 2 महीने तक खनन कार्य बंद रहने की वजह से भवन निर्माण सामग्री की किल्लत हो रही थी. इस किल्लत को दूर करने के लिए ही वहां बड़े स्तर पर ब्लास्ट किए जाने की आशंका भी जताई जा रही हैं.
भिवानी जिला के खानक और डाडम के डाडम पहाड़ में अवैध तरीके से माइनिंग काफी समय से जारी है. डाडम में अवैध खनन के विरोध में काम कर रहे एक एक्टिविस्ट ने पत्रकार राजेश कुंडु से बातचीत करते हुए बताया,” जिस प्रकार अनसाइंटिफिक तरीके से डाडम में खनन हो रहा था इसकी लिखित में शिकायत वहां के तत्कालिक जिला उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, माइनिंग इंजीनियर और डायरेक्टर माइन्स को कई बार दे चुका हूं, लेकिन कार्यवाही के नाम पर मात्र लीपापोती की गई. मैंने उन्हें लिखित में आगाह किया था कि जिस तरीके से खनन हो रहा है कभी भी पहाड़ दरक कर कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है लेकिन इस पर कोई भी कार्यवाही नहीं की गई जिसका अंजाम आज के हादसे के रूप में बहुत सारे परिवारों को भुगतना पड़ रहा है. इस माइनिंग के खेल में लगभग दस से ज्यादा बड़े खिलाड़ी शामिल है जिनमें माफिया के अलावा सत्ता पक्ष, विपक्ष के नेता एवं दिल्ली में बैठे कुछ बहुत ही शक्तिशाली लोग भी है.”
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के डाडम क्षेत्र में हुए अवैध और अवैज्ञानिक खनन की जांच के लिए सेवानिवृत्त जस्टिस प्रीतम पाल कमेटी अपनी अंतिम रिपोर्ट सौपेंगी. कमेटी की रिपोर्ट में पहाड़ की सेटेलाइट इमेज में खनन ठेकेदार की पूरी कारगुजारी कैद है. जस्टिस प्रीतम पाल पूरे मामले पर अंतरिम रिपोर्ट एनजीटी को सौंप चुके हैं. इमेज मिलते ही अंतिम रिपोर्ट भी सौंप दी जाएगी. इसमें जिला प्रशासन की विरोधाभासी रिपोर्ट का भी भेद खुलेगा. जिला प्रशासन ने डाडम पहाड़ पर हुए अवैध व अवैज्ञानिक खनन को लेकर दो अलग-अलग रिपोर्ट सौंपी थी. दोनों आपस में मेल नहीं खाती थी, एक में बताया गया कि खनन गलत तरीके से हुआ है, जबकि दूसरी में कहा कि अवैध खनन के कोई साक्ष्य नहीं हैं.
इस पर एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल का माथा ठनक गया. उन्होंने शिकायतों के मद्देनजर एनजीटी की हरियाणा इकाई के चेयरपर्सन जस्टिस प्रीतम पाल की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति गठित कर दी. इसमें खनिज एवं भू-गर्भ, वन एवं अन्य क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल किए गए. कमेटी को धरातल की स्थिति का जायजा लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए. जस्टिस प्रीतम पाल ने कमेटी सदस्यों के साथ अक्तूबर 2021 में पूरे दिन डाडम पहाड़ का दौरा किया. मौके पर सौ से डेढ़ सौ ग्रामीण मिले, जिन्होंने बेतरतीब खनन को लेकर कड़ी नाराजगी जताई. कमेटी उनके बयान रिकॉर्ड कर चुकी है. ग्रामीणों का कहना है कि खनन ठेकेदार ने वन क्षेत्र में भी खनन किया है.
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