फसल बीमा का फायदा किसानों तक पहुंचाने की कोशिशें तेज

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू होने के बाद अब इसे ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसके लिए राज्य सरकारों और कृषि से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर प्रयास किए जा रहे हैं।
सूखे की मार झेल रहे किसानों को फसल बीमा योजना से काफी उम्मीदे हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के व्यापक प्रचार के चलते भी किसानों में फसल बीमा को लेकर जागरुकता बढ़ी है। कृषि मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस साल गुजरात में 50 हजार किसानों ने ऑनलाइन माध्यम से खुद को प्रधानमंत्रीी फसल बीमा योजना के लिए पंजीकृत किया है। गौरतलब है कि गुजरात में ऑनलाइन पोर्टल के जरिये फसल बीमा के लिए किसानों का पंजीकरण किया जा रहा है। जबकि अन्य राज्यों में बैंकों और सहकारी संस्थाओं के जरिये किसानों को फसल बीमा का लाभ दिलाया जा रहा है।
गौरतलब हैै कि नई फसल बीमा योजना में पुरानी योजनाओं की खामियों को दूर करने का प्रयास किया गया है और प्रीमियम काफी कम कर दिया है। अब खाद्यान्न एवं तिलहन फसलों के लिए प्रीमियम 1.5 से दो प्रतिशत के बीच तथा बागवानी एवं कपास फसलों के लिए पांच प्रतिशत तक रखा गया है।
सूखाग्रस्त यवतमाल के 3.5 लाख किसानों को मिलेगा बीमा का लाभ
सरकारी अधिकारियों का दावा है कि महाराष्ट्र्र के सूखा-ग्रस्त यवतमाल जिले के करीब 3.53 लाख किसानों को विभिन्न बीमा योजनाओं के तहत 191 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा।
जिला प्रशासन अधिकारियों ने कहा कि बीमा कंपनियों ने कुल 191 करोड़ रपए में से 117 करोड़ रुपये राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना और 74 करोड़ रुपये मौसम आधारित योजना के लिए दिए है। जिला कृषि निरीक्षक अधिकारी दत्तात्रोय गायकवाड़ ने बताया कि बीमा कंपनियों से दो योजनाओं के लिए 191 करोड़ रुपये की राशि मिली है और यह धन किसानों के बैंक खातों में जल्दी हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
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