हरियाणा: किसानों की ऑनलाइन फर्द के जरिए किया भावांतर योजना में घोटाला!

किसानों के लिए बनाई गई भावांतर भरपाई योजना में घोटाला सामना आया है. भावांतर योजना का उद्देश्य भिवानी, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, झज्जर और पलवल सहित कई बाजरा उत्पादक जिलों में बाजार की कीमतों में एमएसपी से नीचे गिरावट की स्थिति में किसानों को मुआवजा देना है.इस साल की शुरुआत में, भिवानी जिले के चाहर कलां गांव के कुछ किसानों ने पुलिस और उच्च अधिकारियों को घोटाले के बारे में सूचित किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. नतीजतन, घोटालेबाज बेखौफ होकर काम कर रहे हैं, जिससे किसानों की कीमत पर सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हो रहा है.
अंग्रेजी अखबार द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार भिवानी जिले के भारीवास गांव के सुरेंद्र सिंह तब हैरान रह गए जब उन्हें पता चला कि उनके बाजरे के खेत कृषि विभाग के ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा (एमएफएमबी) पोर्टल’ पर नूंह जिले के एक व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत हैं.
घोटाले को अंजाम देने के लिए ऑनलाइन उपलब्ध खेती योग्य जमीन की फर्द का उपयोग किया जाता है. आरोपी बाजरे की फसल पोर्टल पर अपने नाम दर्ज कराते हैं. बाद में, वे भावांतर भरपाई योजना (बीबीवाई) के तहत मुआवजे का दावा करने के लिए जे-फॉर्म (फसल बेचने के बाद उत्पन्न) के साथ एमएफएमबी रिकॉर्ड पेश करते हैं. इस बीच पीड़ित किसान को इस बात की कोई जानकारी नहीं होती है कि उसकी जमीन के एवज में राहत का दावा किया गया है. इसके बाद फसल रिकॉर्ड को पटवारी, कृषि विभाग की रिपोर्ट द्वारा सत्यापित किया जाता है.
बाजार में एमएसपी (2,500 रुपये प्रति क्विंटल) से नीचे उपज बेचने वाले किसान को लगभग 500 रुपये प्रति क्विंटल का मुआवजा दिया जाता है. यह राशि एमएफएमबी पोर्टल पर पंजीकृत किसान/व्यक्ति के बैंक खाते में जाती है.
खेती बाड़ी से जुड़े मामलों के सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राम कंवर ने कहा कि चाहर कलां, दरियापुर, मिरान और मंडोली कलां गांवों के .(कुछ किसानों ने मार्च में घोटाले का खुलासा किया जब उन्हें पता चला कि उनके बाजरे के खेतों के लिए मुआवजा जारी किया गया था. “उनकी शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, सीएम के उड़नदस्ते की रोहतक इकाई ने मामले की जांच की और बीबीवाई के तहत लाभ लेने वाले 185 व्यक्तियों के खिलाफ भिवानी जिले में एक आपराधिक मामला दर्ज किया. इसके अलावा भिवानी और अन्य जिलों में पांच और एफआईआर दर्ज की गईं.
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