कपास बिजने वाले किसानों, इस महीने आपको सतर्क रहना होगा!

गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) के हमले के खतरे को देखते हुए कपास की फसल के लिए यह महीना बहुत मुश्किल भरा रहने वाला. हरियाणा के कृषि विभाग के अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने किसानों और विभाग के फील्ड स्टाफ को सतर्क रहने और कपास के खेतों की निरंतर निगरानी रखने के लिए सतर्क किया है.
कृषि विशेषज्ञ प्रोफेसर बीआर कम्बोज ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में एक बैठक की है, जिसमें हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों और हरियाणा कृषि विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया था. कम्बोज ने कहा कि कृषि वैज्ञानिक देश के उत्तरी क्षेत्र में कपास की फसल में गुलाबी सुंडी की समस्या की लगातार निगरानी कर रहे हैं.
किसानों को इस महीने में अपने कपास की फसल की सख्त निगरानी करने की जरूरत है, क्योंकि अध्ययनों से पता चला है कि कपास में जितनी भी बिमारियां फैलती हैं, उनकी शुरूआत लगभग इसी समय में होती है. इसलिए उनसे शुरुआती चक्र में ही निपटने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि कपास की फसल में गुलाबी सुंडी के नियंत्रण के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा. पंजाब और राजस्थान सहित हरियाणा और आसपास के राज्यों में कपास पर गुलाबी सुंडी का व्यापक प्रसार चिंता का विषय है, जिसे सामूहिक प्रयासों से नियंत्रित किया जा सकता है. पिछले साल हरियाणा के 14 कपास उत्पादक जिलों में इसका प्रकोप देखा गया था.
पंजाब के बठिंडा और मानसा जिलों और राजस्थान के हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में बीटी कॉटन पर गुलाबी सुंडी की घटनाओं की रिपोर्ट उपलब्ध है. साथ ही इस महीने से रेतीली मिट्टी में उगाई जाने वाली कपास की फसल में पोषक तत्वों की कमी होने लगी है. किसानों को अपनी आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्वों की कमी पूरी करनी पड़ेगी.
प्रो कम्बोज ने बताया, “उत्तरी राज्यों में कपास की फसल के लिए समय पर सलाह के साथ किसानों तक पहुंचने की जरूरत है. अगला महीना कपास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इस समय गुलाबी सुंडी की निगरानी के साथ-साथ पोषक तत्वों के उपयोग पर भी ध्यान देने की बहुत आवश्यकता होगी. फसल में गुलाबी सुंडी के लार्वे, सफेद मक्खी के संक्रमण और कपास की पत्ती मरोड़ विषाणु रोग के प्रभावी प्रबंधन के लिए उन्हें सामूहिक रूप से काम करना होगा.”
कपास की फसल में गुलाबी सुंडी के नियंत्रण के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा. हरियाणा और आसपास के राज्यों में कपास पर गुलाबी सुंडी का व्यापक प्रसार चिंता का विषय है.
इस बैठक का आयोजन हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में किया गया था, जिसमें निजी बीज कंपनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे.
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