ऑक्सफैम रिपोर्ट: गरीब निवाले को भी तरसे, पूंजीपति कोरोना महामारी में भरते रहे अपने धन के कोठे

क्या आप जानते हैं जिस समय पूरी दुनिया के लोग कोरोना महामारी की वजह से खाद्य संकट का सामना करने को मजबूर थे, उसी समय दुनिया भर के गिने चुने मुठ्ठी भर पूंजीपति अपनी संपत्ति दिन दुगनी और रात चौगुनी करने में लगे थे?
क्या आप जानते हैं कोरोना महामारी के दौर में जब दुनिया भर के गरीब, अति गरीब की श्रेणी में जाने के लिए मजबूर थे ठीक उसी समय औसतन हर 30 घंटे में एक नया अरबपति बन रहा था? क्या आप जानते हैं कि अरबपतियों की जितनी दौलत पिछले 23 साल में बढ़ी थी उतनी दौलत अरबपतियों ने पिछले सिर्फ 2 साल कोरोना महामारी के दौर में बढ़ा ली है?
कुछ ऐसे ही चौकाने वाले खुलासे में एक रिपोर्ट में प्रकाशित की गई है. हाल ही में स्विट्डरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के मौके पर ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में ये चौकाने वाले खुलासे किए हैं. ऑक्सफैम ने ‘प्रॉफिटिंग फ्रॉम पेन ‘ यानि की ‘पीड़ा से लाभ’ शीर्षक से सोमवार 23 मई को यह रिपोर्ट जारी की है.
रिपोर्ट के मुताबिक अरबपतियों की जितनी दौलत पिछले 23 साल में बढ़ी थी उतनी दौलत अरबपतियों ने पिछले सिर्फ 2 साल में बढ़ा ली है.
महामारी के दौर में जब खाद्य संकट खड़ा हुआ तो कुछ कंपनियों ने इस अवसर का इस्तेमाल किया, खाद्य और ऊर्जा क्षेत्रों में अरबपतियों की संपत्ति में एक अरब डॉलर की वृद्धि हुई है. पिछले दो साल में खाद्य और ऊर्जा क्षेत्र में अरबपतियों की संपत्ति प्रति दो दिन में एक अरब डॉलर के हिसाब से बढ़ी है. खाद्य और ऊर्जा की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. जिसके परिणामस्वरूप 62 नए खाद्य अरबपति पैदा हुए हैं.

खाद्य क्षेत्र में सबसे ज्यादा मुनाफा सिर्फ दो कंपनियों ने कमाया है; कारगिल और वालमार्ट. कारगिल संपत्ति में 2020 से 65% बढ़ोत्तरी हुई है. इसकी संपत्ति में 15 करोड़ रुपए प्रतिदिन के हिसाब से बढ़ोत्तरी हुई है. वहीं वालमर्ट की संपत्ति लगभग 4 करोड़ प्रति घंटे के हिसाब से बढ़ी है.

संस्था ने अनुमान लगया है कि कोविड-19 के संकट, बढ़ती असमानता और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों से 2022 में 26 करोड़ से भी ज्यादा लोग अत्यधिक गरीबी में जा सकते हैं. इसका मतलब है हर 33 घंटे में दस लाख लोग गरीबी में चले जाएंगे.
साथ ही इस अवधि के दौरान औसतन हर 30 घंटे में एक नया अरबपति बना है और इतने ही समय में दस लाख लोग अत्यधिक गरीबी में गए हैं. 2022 में दुनिया में अरबपतियों की संख्या बढ़कर 2,668 हो गई है, 2020 की तुलना में यह संख्या 573 अधिक है.
लिंग के आधार पर दिये जाने वाले वेतन में गैप और भी बढ़ा है. महिलाओं को पुरुषों के मुक़ाबले पहले ही कम वेतन मिलता था जो अब और भी कम हो गया है. महामारी से पहले इस गैप को भरने में 100 साल लगने का अनुमान था; अब इसमें 136 साल लगेंगे.
कम आय वाले देशों के लोग धनी देशों की जनता की तुलना में खाने पर अधिक खर्च करते हैं. यह अपनी आय का दोगुने से भी अधिक अपने खाने पर खर्च करते हैं.
ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार कोविड महामारी के दौरान फार्मा से जुड़े 40 नए अरबपति बने हैं. मॉडर्ना और फाइजर जैसे फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन कोविड-19 वैक्सीन पर एकाधिकार से हर सेकंड 1,000 डॉलर का लाभ कमा रहे हैं. वे सरकार से जेनेरिक उत्पादन की संभावित लागत से 24 गुना अधिक शुल्क ले रहे हैं. कम आय वाले देशों में 87 प्रतिशत लोगों को अभी भी पूरी तरह से टीका नहीं लग पाया है.
रिपोर्ट में ऑक्सफैम ने दिए सुझाव
ऑक्सफेम ने अपनी रिपोर्ट ‘प्रॉफिटिंग फ्रॉम पेन ‘ यानि की ‘पीड़ा से लाभ’ में दुनिया की सभी सरकारों को सुझाव भी दिए हैं. जिसमें पहला यह है कि बढ़ती कीमतों का सामना करने वाले लोगों का समर्थन करने के लिए अरबपतियों पर एकमुश्त ‘एकजुटता कर’ लगाया जाए.
वहीं बड़े निगमों के अप्रत्याशित मुनाफे पर 90 प्रतिशत का ‘अस्थायी अतिरिक्त लाभ कर’ शुरू करके संकट से मुनाफाखोरी को खत्म करने का समय आ गया है.
ऑक्सफैम ने कहा कि करोड़पतियों पर सालाना दो प्रतिशत और अरबपतियों के लिए पांच प्रतिशत संपत्ति कर लगाने से हर साल 2.52 ट्रिलियन डॉलर जुटाए जा सकते हैं.
इन पैसों से 2.3 अरब लोगों को गरीबी से बाहर निकालने, दुनिया के लिए पर्याप्त टीके बनाने और गरीब देशों में लोगों के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए भुगतान करने में मदद मिलेगी.
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