धान में बौनेपन की बीमारी पर गठित केंद्रीय टीम ने वायरस को बताया बीमारी की वजह!

पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में धान फसल के पौधों में बौनेपन की अनजान बीमारी को लेकर आठ सदस्यीय टीम को ऑन स्पॉट आकलन के लिए प्रभावित राज्यों पंजाब और हरियाणा में जाने को कहा गया है. इस टीम को मंगलवार यानी एक दिन में ही विस्तृत रिपोर्ट कृषि मंत्रालय के एग्रीकल्चर कमिश्नर को सौंपने के लिए कहा गया. आईएआरआई ने धान में बौनेपन की बीमारी पर अपनी एक रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्रालय को सौंपी है. रिपोर्ट में बीमारी की वजह ग्रास स्टंट वायरस या फाइटोप्लाज्मा बैक्टीरिया की संभावना को माना जा रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार फील्ड सर्वे में पाया गया कि धान की फसल में उर्वरक और जरूरी न्यूट्रीशन देने के बावजूद पौधों में बौनेपन की समस्या खत्म नहीं हुई. इस आधार पर माना जा सकता है कि पौधों के बौनेपन के पीछे उर्वर तत्वों की कमी नहीं है. बीमारी से प्रभावित पौधों के सैंपल की जांच करने के बाद फाइटोप्लाज्मा बैक्टीरिया या ग्रास स्टंट वायरस को इसका कारण माना जा रहा है. इन सैंपल के डीएनए को अलग कर इनकी जीन सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट काफी हद तक पौधों में बौनेपन (स्टंटिंग) समस्या को स्पष्ट कर सकेगी.
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार राजेंद्र नाम के किसान ने 22 से 25 जून के बीच अपने 9 एकड़ खेच में धान की पीआर-121 और पीआर-113 की किस्म लगाई थी पहले 30 से 35 दिनों तक फसल में अच्छी ग्रोथ हुई लेकिन इसके बाद धान की फसल की ग्रोथ रुक गई.
वही करनाल स्थित डॉ वीरेन्द्र सिंह लाठर, जो पिछले एक दशक से तर-वत्तर सीधी बिजाई धान तकनीक पर कार्यरत हैं ने बताया कि धान फसल में बौनेपन का मुख्य कारण टूँगरो वायरस कम्पलेक्स है. जिसका प्रकोप मुख्यता प्राइवेट कम्पनियों के बिना टेस्ट किये हाइब्रीड व नकली बीज सीधे किसानों को बेचने से बढा है. टूँगरो वायरस का प्रसार कीट द्वारा धान फसल में फैलता है इस बीमारी से बचाव के लिए, किसान धान फसल क्षेत्र को खरपतवार से मुक्त रखें और कीट नियंत्रण के लिए कलोरोपायरीफास आदि दवा का छिड़काव करें और धान बीज केवल सरकारी कृषि विश्वविधालय व संस्थान से ही खरीदें.
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