यूनिवर्सिटी फंड को लेकर सरकार ने खड़े किए हाथ, “खुद के फंड से चलाएं यूनिवर्सिटी”

हरियाणा की बीजेपी सरकार ने राज्य के सभी यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर एक नया फरमान सुनाया है. पहले से ही फंड की कमी से जूझ रहे प्रदेश के तामाम विश्वविद्यालों को सरकार ने एक और झटका दिया है. दरअसल सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों को एक पत्र लिखकर सेल्फफंडिग से काम चलाने को कहा है.
इतना ही नहीं सरकार की ओर से पत्र में कैसे खुद के लिए फंड जेनरेट करें ये सुझाव भी दिए गए हैं. सरकार ने कहा विश्वविद्यालयों को फंड के लिए सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और फंड जेनरेट करने के लिए खुद प्रयास करने चाहिए. सरकार ने एलुमनाई, सीएसआर, पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप (PPP), रिसर्च ग्रांट, पेटेंट और इतना ही नहीं यूनिवर्सिटी में पड़ी खाली जमीन पर कमर्शियल एक्टिविटी से फंड जेनरेट करने की सलाह दी है.

पहले से शिक्षा बजट कम होने के बावजूद सरकार की इस तरह की नीति सीधे तौर पर छात्रों को प्रभावित करेगी. लगातार फीस बढ़ोतरी के खिलाफ छात्र विरोध प्रदर्शन करते नजर आते हैं ऐसे में सरकार का फंड देने से इनकार करना सीधा छात्रों की फीस में बढ़ोतरी का संकेत है. वहीं सरकार अपने इस फरमान के जरिए प्राइवेट कंपनियों के लिए सरकारी यूनिवर्सिटी के दरवाजे खोलने जा रही है.
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