आट्टे की कीमतों पर रोक लगाने के लिये सरकार ने गेहूं की स्टॉक लीमिट तय की!

गेहूं और आटे की कीमतें पिछले महीने से लगातार बढ़ रही है, तामाम कोशिशों के बाद भी सरकार गेहूं के स्टॉक पर रोक लगाने में विफल रही है, ऐसे में सरकार ने कीमतों को कंट्रोल करने के लिए कई बड़े कदम उठाते हुए गेहूं की स्टॉक लिमिट तय की है. सरकार ओपन मार्केट सेल स्कीम/OMSS के जरिए गेहूं की बिक्री करेगी जिसके पहले चरण में केंद्रीय पूल से व्यापारियों को 15 लाख टन गेहूं बेचने का भी फैसला लिया गया है, जिसके तहत सरकार ने होल सेलर्स के लिए 3 हजार मीट्रिक टन और रिटेलर्स के लिए 10 हजार मीट्रिक टन की स्टॉक लिमिट लगाई गई है जोकि सोमवार से 31 मार्च 2024 तक लागू रहे
गौरतलब है कि गेहूं की रिटेल कीमत में पिछले कुछ समय में आठ फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है. गेहूं की कीमत सात जून को 2129 से बढ़कर 2300 रूपये प्रति क्विंटल हो गयी थी, जिससे सरकार परेशान है. ऐसे में वह किसी भी तरह से गेहूं की कीमत पर लगाम लगाना चाहती है.
पिछले 15 वर्षों में ये पहला मौका है जब सरकार ने गेहूं के स्टॉक होल्डिंग लिमिट तय की है, इससे पहले 2008 में यह फैसला लिया गया था. इसपर खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि होलसेल और खुदरा दाम उतने नहीं बढ़े हैं लेकिन उनके बढ़ने की भी उम्मीद है जिसके चलते सरकार ने गेहूं की स्टॉक लिमिट तय कर दी है.
सरकार 28 जून से OMSS/ओपन मार्केट सेल्स स्कीम के जरिए गेहूं की नीलामी करेंगी. बता दें कि पिछले कुछ दिनों से गेहूं की कीमतें बढ़ रही थी. सरकार की कोशिशों के बाद कीमतें कम नहीं हो रही थी. लिहाजा स्थिति को कंट्रोल करने और सप्लाई बढ़ाने के लिए स्टॉक लिमिट लगा दी है, कुछ दिन पहले सरकार ने दाल के लिए भी स्टॉक सीमा जारी की थी और अब सरकार ने गेंहू पर भी स्टॉक सीमा तय कर दी है.
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